Siyasat Shayari in Hindi

बगावत पर शायरी

बाजार खत्म हुआ
बिक्री तो रोक लो
हम तो दिल दिल बेच देंगे
जाओ अपना बिस्तर समेत लो

सियासत चार दिन की भारी है
मिटाने हमारी बस्ती चला है
दो आदमी मुठ्ठी में भर रहे हैं दुनिया को
अरे इन बस्तियों में जमाना पला है।

जिहाद की भाषा का कुछ अलग मतलब बना दिए
करके शैतान की गुलामी हमारे ख़ंजर छिपा दिए
ख़ंजर तो छिपा दिए मगर दिल कैसे दबाओगे
करके इतने गुनाह उस आग को अब और भड़का दिए।

Rahat Indori Siyasat Shayari

उठेगीं अब मशालें हिसाब तुमको दिखाया जाएगा
जीते जी न जी सके तुम्हारे जुल्म से जो लोग
उस आबाम का क़तरा क़तरा तुमसे निकाला जाएगा
महफ़िल सजा रहे हैं चोर चोर मोसेरे भाई
परिवार जालिमों का गांव भी जलाया जाएगा

क्या मिला और क्या मिलेगा खामोश रहकर
हस्ती भी मिट जाएगी और बस्ती भी जुल्म सहकर
आरोप लगते लगते जीना भूल जाते हैं
कुछ लोग खटक रहे हैं जुबानों में कहकर।

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तानाशाही पर शायरी

आखिरी मिल्कियत ज़माना बुरा नहीं
जो है वो सबसे बुरा है नहीं ऐसा नहीं
कोई तो आए जिसने ज्यादा जुल्म ढाए
कुछ अच्छा किया है तो आकर कोई बताए।

ज़ालिम जुल्म करता है कोई हद नहीं
हमसे ऊँचा बना उसका कभी कद नहीं।

कुछ महफूज़ जमाना कहाँ गया
वो जिसमे सब चैन से जीते थे
हुकूमत उसमें भी कोई हुई होगी
मगर वो पल कितने चैन से बीते थे।

Siyasat Shayari in Hindi

रात भी कटती थी
दिन भी गुज़र जाता था
अमन था शांति थी
जब भी कोई राजा था
अब न जाने कौन
बाग़ का माली है
न फूल नजर आता है
न कलियाँ ही खिलती हैं।
बसंत ऋतु अब भी आती है
हरियाली हर कहीं खिल जाती है
हमारा ही सब कुछ वीरान पड़ा है
न जाने कौन किस कुर्सी पे खड़ा है।

ये क़त्लेआम का सिलसिला जारी रहेगा
इसका कायदा कानून भी भारी रहेगा
तुम उसे जलाओगे वो तुम्हे दफ़नाएगा
और परंपरा, जो आएगा आगे बढ़ाएगा।

झूठे नेता पर शायरी

नजर मेरी फिरी और मक़ाम आ गया
रंजों जुदाई का मुझ पर सवाल आ गया
मैं तो दूसरों की राहों पर लिखता रहा
उसने समझा और प्रशासन छा गया।

ज़ुल्म कुछ इस तरह ढाया
उसने अपने शहर पर
लोग मांगते रहे बराबर
अपने गांव का पानी।

चुनाव पर शायरी

बस हाथ फैला रखे हैं
झोलियां तो खाली हैं
पैसे देकर भीड़ को
बज रहीं ये ताली हैं।

किसका कायदा है
किसकी किताब है
गरीब पे जुल्म ढाना
किसका हिसाब है

फिर किसी रास्ते को अपना रहे हैं
मिले जुल्म दुनिया को बतला रहे हैं
खुद संभलते नहीं सामने आते नहीं
फिर किसी का झूठ छिपा रहे हैं।

भ्रष्ट नेताओं पर शायरी

तेरी तस्वीर से आईने भी ये कहने लगे
इंसान की शक्ल में जानवर आने लगे
जानवर आने लगे तो कुछ हुआ
आसमां में फिर अज़ाब के बदल छाने लगे।

सरे आम हुकूमत तुमसे संभाली नहीं जाती
गाइडलाइन्स सोशल मीडिया की बदलने चले हैं
कोई ख़िलाफ़ है तो होने दो तिहाड़ ख़ाली है
जेलों का ख़ौफ़ पब्लिक में बिठाने चले हैं
भगवा आतंकी है संघठन इनका भी है
बस आरएसएस को लीगल बनाने चले हैं
कई मंदिर बनाए और मस्जिद उजाड़ी
अब मज़हब को धंधा बनाने चले हैं
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई से पहचान थी
अब भारत को उससे मुक्त करने चले हैं
राम नाम पर करते रहते हैं दंगों की बातें
गीता की पवित्रता को मिटाने चले हैं
मजहब नहीं कहता किसी और बुरा
मगर ये लाइन अब ग्रंथो में जोड़ने चले हैं
सोने की चिड़िया से राजनीती का अड्डा बन गया
जो भारत महान था वो अब सरकार का बस्ता बन गया।

दोगले इंसान पर शायरी

मैंने ख़ूब चढ़ाए फूल मंदिर पर
सुकून वहां आया जहाँ गरीब को पाया
धर्म के ठेकेदारों में मैं भी बिक गया था
समझ वहां आया जहाँ मुसीबत को पाया।

ट्विटर पर फॉर्मेलिटी की दुकान चलती है
कोई मर जाए तो उसकी दुआ सरेआम चलती है
नाटक करते हैं सोशल मीडिया पे दिखावे का
कोई जीते जी कुछ मांग ले उसकी आंखे डरती हैं।
बेटा बाप को पूछता नहीं किसी अंजाम से पहले
और फेसबुक पे तारीफों की मुलाकात चलती है
किसी को पद मिला और तो यहाँ जलते हैं लोग
और टैगिंग हैंडल पर खुशियों की बारात चलती है
मुबारकबाद देते नहीं किसी की शादी की भी
वहां फीलिंग हैप्पी लिखकर पोस्ट चलती है
ज़मीर जागता है तो जमीं जानती होगी
दुनिया में साफ़ जुबान नहीं चलती है।

Siyasat Status in Hindi

ग़र हुकूमत की ढाल में ढल गया
आम आदमी का निकल कल गया
सियासत की पकड़ कब तक रहेगी
जब झूठ ही सच्चाई से मिल गया।

सियासत बताने वाले
दुनिया सताने वाले
गुजरती हुई शाम
और तेरा मक़ाम
दोनों एक ही हैं।

एहसान करते करते 10 साल गुज़र गए
कई लोग पैसों के साथ नदियों में मर गए
तूफ़ान था या कोई ग़म की आंधी थी
मजबूर था मगर भक्ति की ठानी थी।

झूठे वादे शायरी

मुश्किल वक़्त था साहब निकल गया
नक़ाब उनके चेहरे से अब हट गया
अब यक़ीनन किसी पर यक़ीन न होगा
एक दिल था वो भी बदल गया।

उसका सब कुछ छीन लिया वक़्त के हाक़िम ने
वक़्त मगर फिर भी उसे तसल्ली देता रहा
जो आज है क्या पता कल हो न हो साहब
ज़माना यही हमको ता उम्र सिखाता रहा

Shayari on Siyasat

जुल्म के खिलाफ बगावत पर शायरी और तानाशाही पर शायरी पढ़ने के लिए आपका हमारे पेज पर स्वागत है। हम झूठे नेता पर शायरी और चुनाव पर शायरी लिखकर लोगों को राजनीती का मतलब समझाते हैं जिसको पढ़कर बहुत से लोग अपने आस पास हो रहे अत्याचार के ख़िलाफ़ आवाज़ भी उठाते हैं। इसके साथ ही आप यहाँ भ्रष्ट नेताओं पर शायरी और कविताएं मुफ्त में पढ़ सकते हैं रोजाना हमारे लेख़क इस वेबसाइट पर नई नई पोस्ट डालते रहते हैं। सत्ता में रहकर जुल्म ढाने वाले दोगले इंसान पर शायरी लिखकर आप भी इस वेबसाइट में डाल सकते हैं अगर आप भी एक लेखक हैं और हमसे जुड़ने के लिए कमेंट बॉक्स में अपने बारे में बता सकते हैं। कुछ नीच और कमीने लोगों के बारे में सोचते हुए हमने उनके ऊपर झूठे वादे शायरी को पेश किया है हमारी यह पोस्ट झूठे नेता और नाटकीय सत्ता चलाने वालों के ऊपर हैं।

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सियासत शायरी इन हिंदी

पहाड़ों के नीचे झोपड़ी बड़ी शान से खड़ी है
मकान होते कोई तो मजबूत दिखाने पड़ते
सर्द बरसात में कोई भिखारी सो जाता है चैन से
कोई अमीर भीग जाता तो श्मशान सजाने पड़ते
सरकार देखती नहीं अगर सौ गरीब भी मर जाए
कोई नेता दम तोड़ दे तो पड़ताली बुलाने पड़ते।
कोरोना में मौत के आंकड़े दिखाते हैं बार-बार
कोई भूख से मर जाए तो मुद्दे भटकाने पड़ते।

Siyasat Shayari in Urdu

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