Love Poetry in Hindi

सोच सोच के उसको थक चूका हूँ मै
ले ले के नाम उसका पक चूका हूँ मैं
एक वो ही थी ज़िन्दगी में मेरी ख़ास
यादें उसकी समेटकर रख चूका हूँ मैं
अब क्या क्या पूछेगी तू मुझसे ए पुलिस
सारा किस्सा सामने तेरे बक चूका हूँ मैं
तेरे सपने क्या सुलायेंगे अब मुझे
साये से तेरे अब जग चूका हूँ मैं
सामान न तेरा अब कोई ले पाऊंगा
निकाल पहले ही तेरा हक़ चूका हूँ मैं
पता नहीं था पहले कि तू ऐसी है
अब कर तुझ पर शक़ चूका हूँ मैं

उसके आसूं उसका रोना
हराम हो गया था मेरा सोना
फिर एक प्यारी शाम आई
जो एक दो खुशियां भी लाई
महक उठा हर एक कोना
जब उसको हो गया कोरोना
अब खुश हूँ मैं मेरे यार
भाड़ में जाए उसका प्यार

लिखते लिखते बारे में उसके रात आ गई
कर रहा था कुछ पर उसकी बात आ गई
महफ़िल में ले गया था उसको घुमाने ऐसे ही
पर बोल कर एक शायरी वो तो छा गई
देखा जो मैंने आकर अपने घर
खाना मेरे हिस्से का भी वो खा गयी

एक लड़की पे मैं मरता हूँ
प्यार उसे बड़ा करता हूँ
उठा लाता मैं उसको घर से उसके
पर उसकी मम्मी से बड़ा डरता हूँ
प्यार में पड़कर उसके आज भी
दुखों का सागर भरता हूँ
लड़की थी वो दीवानी सी
जिसको प्यार मैं करता हूँ
मैं कल भी प्यार उससे करता था
और आज भी उससे करता हूँ
आँखे हैं उसकी नशीली सी
उसके होटों पे मरा करता हूँ
एक लड़की पे मैं मरता हूँ
प्यार बड़ा उसे करता हूँ
जगह जगह हर गली गली
ढूंढता उसे मैं फिरता हूँ
देखकर उसको अपने दिल मैं
हवा में उड़ता रहता हूँ
एक लड़की पे मैं मरता हूँ
प्यार बड़ा उसे करता हूँ
वो जब जब आहें भरती है
दिल मेरा झूम जाता है
कर देती है वो कुछ खोट बिगाड़
तो दिमाग़ मेरा घूम जाता है
पता नहीं कब उसे मिल जाऊँगा
शायद एक दिन उसे ढूंढ पाउँगा
मैं आज भी उसपे मरता हूँ
प्यार उसे बड़ा करता हूँ
लड़की थी वो दीवानी सी
जिसके संग मैं रहा करता हु

हज़ार ज़ख़्म जो तुम दोगे शौक़ से लेंगे
किसी भी हाल तुम्हें आंख नम नहीं देंगे ।
हमारे पास ज़रूरत नहीं के तुम आओ
अलग ही होने तुम्हें हमसे हम नहीं देंगे ।
अमीर लोग हैं तुम जाओ लेलो नौलखा
जो प्यार चाहिए हम डोज़ कम नहीं देंगे ।
तुम्हारे नाज़ उठाएंगे अनगिनत दे दो
हमें हज़ार मिलें तुमको ग़म नहीं देंगे ।

नामों का शोर तेरे शहर में
कामों का ज़ोर है तेरे ज़हन में
हमें एक बार अपना बना के तो देख
ढल जायेंगे हम तेरे रहन में
तेरा एक लम्हा भी मंज़ूर है हमें
न रुक सकेंगे तेरे क़हर में
तेरा अल्फ़ाज बड़ा निराला है
याद करते हैं तुझे दोपहर में
चाँद में दाग़ है तो क्या हुआ
न हो सकेगा वो तेरे सहन में..

मेरे हर ख्वाब में तू है
मेरी हर सांस में तू है
मेरे एहसास में तू है
मेरे अरमान में तू है
मेरे इन्साफ में तू है
मेरी जुबां में तू है
मेरी जान में तू है
मेरी पहचान में तू है
मेरी रूह में तू है
मेरी हर धड़कन में तू है
मेरी हर पकडन में तू है
देखु में तुझे सुबह और शाम
तेरा कर दू मै हर एक काम
ज़िन्दगी को कर दू मै तेरे ही नाम
मेरी ज़िन्दगी का है ये अरमान
तेरे लिए दे दूँ मै अपनी जान
तुझपे कुर्बान मै तो तुझपे कुर्बान

Indian Poems

हम जिस देश में रहते हैं
उस देश की कहते हैं
वो जो देश है मेरा
वही अब वेश है मेरा
मेरी धड़कन से जुड़ा है
वही सन्देश है मेरा
मेरी आँखों का ये पानी
लिखेगा मेरे देश की कहानी
सुनेगा अब मेरी ज़ुबानी
मेरा अरमान यही है
मेरा देश वही है
मेरे देश की मिटटी
है वही बॉर्डर की चिट्टी
मेरा देश कहेगा अब
भारत ही रहेगा अब
मेरे देश ने ठानी है
एक बार चलानी है
वो अक़्47 का ख्वाब
जलता है जो आफ़ताब
वो बॉर्डर की कहानी है
सुने मेरी जुबानी है
मेरे देश ने ठानी है

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