Urdu Poerty and Nazm in Hindi

मैं मुसलमान हूँ – Urdu Poetry in Hindi

मैं एक नाम हूँ
तेरा अरमान हूं
तुझसे कैसे डरूं तू बता
मैं मुसलमान हूँ मैं मुसलमान हूँ

तेरी हसरत नहीं होगी पूरी
तेरी तमन्ना रह जाएगी अधूरी
मैं जोड़ता इसमें ईमान हूँ
मैं मुसलमान हूँ मैं मुसलमान हूँ

वहां पे तू बेजुबान होगा
बुरा तेरा अंजाम होगा
चार दिन की हुकूमत पे इतना नशा
मैं तो सदियों से सुल्तान हूँ
मैं मुसलमान हूँ मैं मुसलमान हूँ

अपनी हरकतों से किसी को न सता
सच्चाई जाकर अपनी सबको बता
बैठकर कुर्सी इतराता है तू
मैं तो दोनों जहाँ की जान हूँ
मैं मुसलमान हूँ मैं मुसलमान हूँ

तेरी अच्छाई जंग खाने लगी
तेरी बुराई शर्माने लगी
आजा लग जा तू भी मेरे गले
मैं तेरा ईमान हूँ
मैं मुसलमान हूँ मैं मुसलमान हूँ

तू न होगा कभी कामयाब
बताएगा अगर खुद को साहब
आजा तू भी उसकी पनाह में
जिस रसूल का मैं गुलाम हूँ
मैं मुसलमान हूँ मैं मुसलमान हूँ

तेरी सोच बिलकुल छोटी है
तेरे गुनाहों की पोटली मोटी है
करले तू भी उससे तौबा
मैं जिसका मेहमान हूँ
मैं मुसलमान हूँ मैं मुसलमान हूँ

छोटो पर जुल्म ढाता है तू
बेईमानी की खाता है तू
करले तू भी उनसे मुहब्बत
जिनका रखता मैं मान हूँ
मैं मुसलमान हूँ मैं मुसलमान हूँ

कब तक जलेगा कुफ्र की आग में
रौशनी को तरस जायेगा उस जहान में
तेरी दौलत को सही से कमा तो ज़रा
जैसे करता मैं काम हूँ
मैं मुसलमान हूँ मैं मुसलमान हूँ।

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